दलाई लामा का उत्तराधिकारी चुनने से चीन को रोकेगा अमेरिका

वाशिंगटन, प्रेट्र। दलाई लामा का उत्तराधिकारी चुनने को लेकर जारी चीनी दखल को रोकने वाले अमेरिकी कानून को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंजूरी दे दी है। इसके तहत वाशिंगटन ना केवल तिब्बत में वाणिज्य दूतावास स्थापित करेगा बल्कि यह भी सुनिश्चित करेगा कि अपने सर्वोच्च धर्म गुरु का चयन सिर्फ बौद्ध समुदाय ही करे। इस संबंध में बीजिंग पर दबाव बनाने के लिए एक अंतरराष्ट्रीय गठबंधन बनाने की बात भी कही गई है। नए कानून में भारत में रहने वाले तिब्बतियों के लिए साठ लाख डॉलर का प्रावधान किया गया है।

तिब्बतन पॉलिसी एंड सपोर्ट एक्ट’ में तिब्बत से संबंधित विभिन्न कार्यक्रमों और प्रावधानों को फिर से अधिकृत किया गया है। चीन के विरोध के बावजूद पिछले सप्ताह अमेरिकी सीनेट में सर्वसम्मति से यह विधेयक पारित किया गया था। इस कानून के तहत ना केवल तिब्बत में मौजूद बौद्ध समुदायों का समर्थन करने वाले गैर सरकारी संगठनों को सहायता प्रदान की जाएगी बल्कि अमेरिका में तब तक नए चीनी वाणिज्य दूतावास खोलने पर प्रतिबंध लगाया गया है जब तक तिब्बत की राजधानी ल्हासा में वाशिंगटन अपना वाणिज्य दूतावास नहीं खोल लेता।

अमेरिका की अब तक की नीति रही है कि वह चीन सरकार और चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के ऐसे अधिकारियों पर कार्रवाई करता है, जो दलाई लामा के उत्तराधिकारी चुनने को लेकर जारी प्रक्रिया में संलग्न रहे हैं। मौजूदा दलाई लामा को बीजिंग अलगाववादी के तौर पर देखता है। जबकि स्वयं दलाई लामा मध्यमार्गी दृष्टिकोण की वकालत करते हुए तिब्बत में मौजूद साठ लाख लोगों के लिए स्वायत्ता की मांग करते हैं।

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